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    सितंबर में जीएसटी कलेक्शन 1.45 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान, 1 अक्तूबर को जारी होंगे आंकड़े

    GST Collection:  सितंबर में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अगस्त में 28 फीसदी उछाल के साथ यह 1.43 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया था।

    मार्च से जीएसटी संग्रह लगातार 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। अधिकारी ने कहा, जीएसटी राजस्व सितंबर में 1.45 लाख करोड़ रुपये से कुछ अधिक रहने का अनुमान है। कारोबारी गतिविधियों में तेजी से आने वाले महीनों में संग्रह और अच्छा होने की उम्मीद है।

    भारतीयों की बचत करने की आदत पांच साल के निचले स्तर पर आई, महंगाई और मांग ने पहुंचाई चोट

    राजस्व के आधिकारिक आंकड़े एक अक्तूबर को जारी किए जाएंगे। पिछले वर्ष सितंबर में यह 1.17 लाख करोड़ रुपये रहा था। उल्लेखनीय है कि इस साल अप्रैल में जीएसटी संग्रह 168 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने अगस्त में जीएसटी संग्रह के बारे में अनुमान जताते हुए कहा था कि यह 1.42 से 1.43 लाख करोड़ रुपये के बीच रहेगा और उनका यह अनुमान सही साबित हुआ। सेठ ने कहा था कि जीएसटी संग्रह में वृद्धि अर्थव्यवस्था में तेजी का संकेत देती है।

    चुनौतियों से उबर रही अर्थव्यवस्था

    आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि रूस-यूक्रेन संकट शुरू होने के बाद पिछले छह माह में भारत समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से गुजरी है। दुनिया में आर्थिक मंदी का संकट गहराने लगा है। वहीं भारत में मार्च से लगातार जीएसटी संग्रह 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का मतलब है कि भारतीय उद्योग ने कोरोना संकट का सामना करते हुए किसी भी अप्रत्याशित चुनौती का सामना करना सीख लिया है और वह कारोबारी गतिविधियों को आगे बढ़ाने को लेकर उत्साहित हैं।

    टैक्स जमा करने में आगे आ रहे करदाता

    वित्त मंत्रालय का कहना है जीएसटी में पहले से अधिक लोग टैक्स जमा करा रहे हैं और इसकी रिपोर्टिंग बेहतर हुई है जिससे कमाई बढ़ी है। सरकार ने यह भी कहा है कि कोरोना काल में आर्थिक स्थिति खराब थी, लेकिन अब जोरदार रिकवरी है जिसका सकारात्मक असर जीएसटी संग्रह पर देखने को मिल रहा है।

    कब कितनी रही जीएसटी वसूली

  • अगस्त में 1.43 लाख करोड़ रुपये
  • जुलाई में 1.49 लाख करोड़ रुपये
  • जून में 1.44 लाख करोड़ रुपये,
  • मई में 1.41 लाख करोड़ रुपये
  • अप्रैल में 1.68 लाख करोड़ रुपये
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